हबीब ज़ालिब

हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है

Posted on Updated on

पाकिस्तानी शायर हबीब ज़ालिब की कलम से

ग़ज़ल

हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है

लेकिन इन दोनों मुल्कों में अमरीका का डेरा है

ऐड की गंदम खाकर हमने कितने धोखे खाए हैं

पूछ ना हमने अमरीका के कितने नाज़ उठाये हैं

फिर भी अब तक वादी-ए-गुल को संगीनों ने घेरा है
हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है

खान बहादुर छोड़ना होगा अब तो साथ अंग्रेजों का
तौबा गरेबाँ आ पहुंचा है फिर से हाथ अंग्रेजों का

मैकमिलन तेरा ना हुआ तो कनेडी कब तेरा है
हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है

ये धरती है असल में, प्यारे, मजदूरों दहकनों की
इस धरती पर चल ना सकेगी मर्जी चंद घरानों की
ज़ुल्म की रात रहेगी कब तक अब नज़दीक सवेरा है
हिंदुस्तान भी मेरा है और पाकिस्तान भी मेरा है

मौलाना

बहुत मैंने सुनी है आपकी तक़रीर मौलाना

मगर बदली नहीं अब तक मेरी तकदीर मौलाना

खुदरा शुक्र की तलकीन अपने पास ही रखें

ये लगती है मेरे सीने पे बन कर तीर मौलाना

नहीं मैं बोल सकता झूठ इस दर्ज़ा ढिठाई से

यही है जुर्म मेरा और यही तकसीर मौलाना

हकीकत का क्या है, ये तो आप जाने या खुदा जाने

सुना है जिम्मी कार्टर है आपकी पीर मौलाना

जमीन हो वड़ेरों की, मशीनें हों लुटेरों की

खुदा ने लिखके दी है ये तुम्हें तहरीर मौलाना

करोड़ों क्यों नहीं मिलकर फिलस्तीन के लिए लड़ते

दुआ ही से फ़क्त कटती नहीं ज़ंजीर मौलाना

पाकिस्तान का मतलब क्या

रोटी, कपड़ा और दवा
घर रहने को छोटा सा
मुफ्त मुझे तालीम दिला
मैं भी मुसलमाँ हूँ वलाह
पाकिस्तान का मतलब क्या
ला इलाह इल्ललाह…

अमरीका से मांग न भीख
मत कर लोगों की तजहीक
रोक ना जम्हूरी तहरीक
छोड़ ना आज़ादी की राह
पाकिस्तान का मतलब है क्या
ला इलाह इल्ललाह…

खेत वड़ेरों से ले लो
मिल्लें लुटेरों से ले लो
मुल्क अंधेरों से ले लो
रहे ना कोई अलीजाह
पाकिस्तान का मतलब क्या
ला इलाह इल्ललाह…

सरहंद, सिंध, बलूचिस्तान
तीनों हैं पंजाब की जान
और बंगाल है सब की आन
आये ना उनके लब पे आह
पाकिस्तान का मतलब क्या
ला इलाह इल्ललाह…

बात यही है बुनियादी
घासिब की हो बर्बादी
हक़ कहते हैं हक़ आगाह
पाकिस्तान का मतलब क्या
ला इलाह इल्ललाह…

ख़तरे में इस्लाम नहीं
खतरा है ज़र्दारों को
गिरती हुई दीवारों को
सदियों के बीमारों को
ख़तरे में इस्लाम नहीं

सारी ज़मीं को घेरे हुए हैं
आख़िर चंद घराने क्यों
नाम नबी का लेनेवाले
उल्फत से बेगाने क्यों

खतरा है खूंख्वारों को
रंग-बिरंगी कारों को
अमरीका के प्यारों को
ख़तरे में इस्लाम नहीं

आज हमारे नारों से लर्जां है बपा एवानों में
बिक न सकेगें हसरतो-अरमाँ ऊँची सजी दुकानों में

खतरा है बटमारों को
मगरिब के बाज़ारों को
चोरों को,मक्कारों को
ख़तरे में इस्लाम नहीं

अमन का परचम लेकर उट्ठो
हर इंसान से प्यार करो
अपना तो मन्शूर है जालिब
सारे जहाँ से प्यार करो

खतरा है दरबारों को
शाहों के गम्ख्वारों को
नव्वाबों,गद्दारों को
ख़तरे में इस्लाम नहीं

http://www.revolutionarydemocracy.org/rdv9n1/jalibpoems.htm से साभार

Advertisements