बीबीसी द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के अनुसार मुक्त बाजार पूंजीवाद त्रुटिपूर्ण

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बर्लिन दीवार के गिरने के 21  साल बाद, बीबीसी (देखें BBC News) के  नए सर्वेक्षण  ने मुक्त बाजार पूंजीवाद के साथ व्यापक असंतोष जाहिर किया है.

पूछ्ताश में 27 देशों के लोग शामिल थे जिसमे में केवल 11  प्रतिशत लोगों ने माना कि यह ठीक-ठाक काम कर रहा है.

ज्यादातर लोगों का मानना था कि विनियमन और पूंजीवादी व्यवस्था में सुधार आवश्यक है.

इस प्रश्न पर भी गहरे मतभेद पाए गए कि क्या सोवियत यूनियन का अंत एक सुखद घटना थी.

यूरोप के लोगों के लिए 1989  में बर्लिन दीवार गिराए जाना एक सुखद घटना थी जिसे मुक्त बाजार पूंजीवाद की जीत के रूप में पेश किया गया.

पिछले 20  वर्षों से मुक्त बाजार में विश्वास संबधी विश्व जनमत को आर्थिक और वित्तीय संकट ने काफी क्षति पहुंचाई है.

27 देशों में 29,000 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई. केवल पाकिस्तान और अमेरिका में पांच में से एक से अधिक  लोगों ने माना कि पूंजीवाद ठीक-ठाक काम कर रहा है.

सर्वेक्षण में शामिल सभी लोगों का 23  प्रतिशत इसमें गंभीर त्रुटियां देखता है जिसमें फ्रांस के 43%,मेक्सिको के 38% और 35% ब्राजील के हैं.

इन 27 देशों में से 22 देशों के लोगों ने सरकारों द्वारा धन के अधिक सामान वितरण का जोरदार समर्थन किया है.

सर्वेक्षण में अगर किसी मुद्दे पर  वैश्विक आम सहमति बन पाई है तो वह है : लगभग सभी देशों का बहुमत मानता है कि सरकारें अधिक से अधिक व्यापार विनियमन करें.

केवल तुर्की ही ऐसा देश है जो चाहता है कि सरकार द्वारा कम से कम विनियमन हो.

सोवियत यूनियन के ध्वंस पर जनमत सबसे अधिक बँटा हुआ है.

यूरोप के अधिकतर लोगों के लिए यह सुखद घटना है – जर्मनी 79%, ब्रिटेन 74% और फ्रांस 76% का मानना है कि यह अच्छी बात थी.

लेकिन विकसित विश्व से बाहर बिल्कुल उल्ट बात है. मिश्र के दस में से सात लोगों के अनुसार यह अप्रिय घटना थी. इसी प्रकार भारत , केन्या और इंडोनेशिया में भी इस घटना पर गंभीर मतभेद पाए गए.

Story from BBC NEWS:
http://news.bbc.co.uk/go/pr/fr/-/2/hi/in_depth/8347409.stm

Published: 2009/11/09 00:00:07 GMT

© BBC MMIX

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2 thoughts on “बीबीसी द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के अनुसार मुक्त बाजार पूंजीवाद त्रुटिपूर्ण

    loksangharsha said:
    November 16, 2009 at 8:19 PM

    nice

    Krishna Kumar Mishra said:
    November 21, 2009 at 12:36 AM

    कामरेड आप बहुत ही तर्कपूर्ण व वाजिब बात रखते है ब्लाग के माध्यम से, मेरी शुभकामनायें

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