आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है

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अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम !

भगत सिंह की बात सुनों,

नई क्रांति की राह चलो !

मेहनतकश बहनों और भाईयो,bhagat singh

28 सितंबर को महान शहीदे-आजम का 102वाँ जन्मदिन है. शहीदे-आजम के जन्मदिन पर जरूरत है कि हम महज रस्मी श्रद्धान्जलियों से हटकर अपने महबूब शहीद की याद को सच्चे दिल से ताजा करें. यह ज़रुरत सिर्फ इसलिए नहीं है कि वे विदेशी गुलामी से देश को आजाद करवाने के लिए भरी जवानी में अपनी जान तक की बाजी लगा गए. भयंकर शोषण उत्पीडन का शिकार मेहनतकश जनता के लिए शहीद भगतसिंह को याद करना आज इससे भी गहरे अर्थ रखता है.

शहीद भगतसिंह के विचारों को दबाने की जितनी साजिशें अंग्रेजों ने की थी, वे आजाद भारत के लुटेरे हुक्मरानों की साजिशों के सामने कुछ भी नहीं है. बेहद घिनोनी साजिशों के तहत शहीदे-आजम भगतसिंह के विचारों को दबाने की कोशिश की गयी. १९४७ के बाद देश की राज्यसत्ता पर काबिज हुए काले अंग्रेजों ने शहीद भगतसिंह की आजादी की लडाई के बारे में इस झूठ का हमेशा प्रचार किया कि वे तो सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे. उनके मुताबिक शहीद भगतसिंह के बुतों पर फूल मालाएं पहनना ही उन्हें श्रद्धांजलि देने का तरीका है. लेकिन यह कड़वी सच्चाई किसी से छुपी नहीं है कि हम आज भी एक बेहद अँधेरे समय में रह रहे हैं. साधारण जनता के लिए इस देश में आज़ादी नाम की कोई चीज नहीं है. शहीद भगतसिंह के सपनों के समाज का निर्माण होना अभी बाकी है.

शहीद भगतसिंह और उनके साथियों ने एक ऐसे समाज के निर्माण का सपना देखा था जहाँ इन्सान के हाथों इन्सान की लूट न हो, जहाँ अमीरी-गरीबी की असामानताएं न हों, जहाँ धर्मों-जातियों-क्षेत्रों के नाम पर झगडे न हों, जहाँ स्त्री-पुरषों में असमानता न हो. वे एक ऐसे समाज के लिए संघर्ष करते रहे जहाँ मेहनतकश जनता रहने-खाने-पहनने सहित शिक्षा-स्वास्थ्य, मनोरंजन, आदि सहूलतें हासिल कर सके. वे हर मेहनतकश व्यक्ति के लिए इन्सान की ज़िन्दगी, मान-सम्मान की ज़िन्दगी चाहते थे.  लेकिन शहीदे-आजम भगत सिंह के प्यारे मेहनतकश लोग आज भी इस आजाद देश में गुलामों की ज़िन्दगी जीनेपर मजबूर कर दिए गए हैं. देश की साधारण जनता की बेहद दर्दनाक परस्थितियाँ शहीद भगतसिंह के सपनों के तार-तार होने की कहानी बयान कर रही हैं.

देश में १८ करोड़ लोग फुटपाथों पर सोते हैं, १८ करोड़ लोग झुगी-झोपडियों में रहते हैं. हर रोज ९ हज़ार बच्चे कुपोषण का शिकार होकर मर रहे हैं. ३५ करोड़ लोगों को भूखे सोना पड़ता है. देश के लगभग ८० करोड़ से भी अधिक औद्योगिक और खेतियर मजदूर और गरीब किसान दिन-रात की कड़ी मेहनत के बावजूद भी भूख और कंगाली से जूझ रहे हैं. करोडों नौजवानों के पास कोई रोजगार नहीं है. आर्थिक तंगियों-परेशानियों से घिरे लोग आत्महत्या कर रहे हैं. कमरतोड़ महँगाई गरीबों के मुहं से रोटी का आखिरी बचा निवाला भी छीनने जा रही है. फल, दूध, दही तो गरीबों की पहुँच से पहले ही बाहर थे – अब आलू, दाल भी खरीद पाना गरीबों के लिए असंभव सा होता जा रहा है.

हमारे इस आजाद भारत में हर सेकंड में एक स्त्री बलात्कार का शिकार होती है. हर वर्ष ५० हज़ार से अधिक बच्चे गायब होते हैं जिनमें से अधिकतर लड़कियां होती हैं. इनमें से अधिकतर लड़कियों को देह व्यापार के धंधे में जबरन धकेल दिया जाता है. इन बच्चों को भीख मांगने पर मजबूर कर दिया जाता है या फिर उनके शरीर के अंग निकालकर बेच दिए जाते हैं.

यह शहीद भगतसिंह के सपनों की आज़ादी नहीं है. यह आज़ादी पूंजीपतियों की आज़ादी है.देश की ऊपर की आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का ८५ प्रतिशत है, वहीँ गरीबी का शिकार देश की निचली ६० प्रतिशत के पास सिर्फ २ प्रतिशत ही है. आज़ादी के ६ दशकों के दौरान २२ पूंजीपति घरानों की संपत्ति में ५०० गुना से भी अधिक बढोत्तरी हुई है. साम्राज्यवादी लूटेरों को भारतीय मेहनतकश जनता को लूटने के लिए बेहिसाब छूटें दी जा रही है. संसद-विधानसभाएँ चोर-गुंडे-बदमाशों-परजीवियों के अड्डे हैं जहाँ पूंजीपतियों द्वारा मेहनतकशों के हो रहे लूट-शोषण को बनाए रखने की स्कीमें बनाई जाती हैं, हक़-अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली जनता के दमन के लिए काले कानून तैयार किये जाते हैं.

यह है वह काली आज़ादी जिसकी जय जयकार करते देश के लूटरे हुकमरान कभी नहीं थकते.

क्रांतिकारी यह बात अच्छी तरह जानते थे कि अंग्रेजों से राज्यसत्ता भारतियों के हाथ आ जाने से ही देश की विशाल जनता की हालत में कोई बदलाव नहीं आने वाला. शहीद भगतसिंह ने कहा था :

हम यह कहना चाहते हैं कि एक जंग लड़ी जा रही है जो तब तक जारी रहेगी जब तक इन्सान के हाथों इन्सान की लूट जारी रहेगी, जब तक कुछ शक्तिशाली व्यक्ति भारतीय जनता की आमदनी से साधनों पर कब्जा जमाये रखेंगे. यह लूटेरे अंग्रेज हों या भारतीय इससे स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ता.

यह थे शहीद-भगतसिंह के जंगे-आजादी के सच्चे मायने जिन्हें दबाये रखने की कोशिशे भारतीय लूटेरे हुकमरानों द्वारा आज तक जारी है. हुकमरानों ने इतिहास की किताबों में शहीद भगतसिंह की आजादी की लड़ाई को हमेशा तोड़-मरोड़कर पेश किया. यही कारण है कि आज पढ़े-लिखे लोग भी भगतसिंह की जंगे-आज़ादी के इन मायनों से अनजान हैं – लेकिन लूटेरे हुकमरान कितनी भी साजिशें क्यों न रचते हों, शहीद भगतसिंह के विचार आज भी जिंदा है. जैसा कि शहीदे-आजम ने कहा था : हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली, ये मुशते खाक है फानी, रहे, रहे, न रहे. समाज के आमूलचूल बदलाव की तड़फ रखने वाले आज भी शहीदे-आजम की क्रांतिकारी सोच से प्रेरणा और मार्गदर्शन ले रहे हैं – शहीदे-आजम आज भी लूट,शोषण, जुल्म, दमन, अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले जिंदादिल इंसानों के दिलों की धड़कन हैं. वे आज भी जलती मशाल की तरह इन्कलाब की राह रोशन कर रहे हैं. लूटेरों के दिलों में आज भी भगतसिंह के विचार खौफ पैदा कर रहे हैं. उनके विचारों को दबाकर रखने की कोशिश के रूप में शहीद भगतसिंह को एक बार नहीं बल्कि अनेकों-अनेक बार फाँसी लगाने की कोशिशें होती आई हैं लेकिन शोषितों-उत्पीडितों के दिलों में वे आज भी लूट,शोषण, जुल्म, दमन, अन्याय, गुलामी से मुक्ति की आशा बनकर अमर हैं. वे आज भी हर मेहनतकश को इन्सान के हाथों इन्सान की लूट रहित नए समाज के निर्माण के महान पथ के राही बनने के लिए ललकार रहे हैं.

आज के अँधेरे समय में शहीद भगतसिंह के विचारों पर अमल करना ही उन्हें एकमात्र सच्ची श्रद्धाजंली हो सकती है. आओ , शहीद भगतसिंह के जन्मदिन पर उनके सपनों के समाज के निर्माण का प्रण लें.

हम सभी सच्चे लोगों को शहीद भगत सिंह के

सपनो के समाज के निर्माण के लिए चल रही जदोजहद में

हमारे हमसफ़र बनने का आह्वान करते हैं !

कारखाना मजदूर यूनियन लुधियाना

संपर्क : शहीद भगत सिंह पुस्तकालय, गली न. ५, लक्ष्मण नगर, ग्यासपुरा, लुधियाना

फ़ोन : 98771-43788 , 98886 -55663

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One thought on “आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है

    रवि कुमार, रावतभाटा said:
    September 28, 2009 at 12:43 PM

    हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली, ये मुशते खाक है फानी, रहे, रहे, न रहे…

    इसी ख्याल की बिजली को हवाओं से हर ज़ेहन में उतारने का महती कार्य आज की सबसे बड़ी जरूरत है…

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