चार्टिस्ट आन्दोलन – मेहनतकश वर्ग का राजनीतिक संगठन

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26.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव

की व्याख्यात्मक टिप्पणियां

हड़तालों की घोषणा, ट्रेड यूनियनों का गठन, यूनियनों का पहले क्षेत्रीय संगठनों और बाद में राष्ट्रीय संगठनों में समेकन और उसके बाद कई यूनियनों से अस्थाई संघ बनाने की कोशिश करने का काम मेहनतकशों के राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ  चलता रहा और इसने 1836-37 के संकट के बाद गंभीर हलचल का रूप धारण कर लिया था. 1839 में नेशनल चार्टिस्ट एसोसिएशन की स्थापना उन मांगों के समर्थन में आन्दोलन करने के लिए की गयी थीं जो एक साल बाद पीपुल्स चार्टर में प्रस्तुत किये गए थे. इस निकाय का खास मकसद कारीगरों और मेहनतकश वर्गों  की तकलीफों को कम करना था और इसे मजदूरों की पहली राजनीतिक पार्टी कहा जा सकता है. एंगेल्स इस तथ्य का स्पष्ट विवरण पेश करते हैं कि अलग-अलग यूनियनों का आंशिक संघर्ष और इनका राष्ट्रीय स्तर पर वर्ग संघर्ष में मिल जाना कैसे सारे मेहनतकश वर्ग के राजनीतिक संघर्ष में रूपांतरित हो जाता है.

“मेहनतकश कानून का समादर नहीं करता है. वह केवल तभी इसके विधानों का पालन करता है जब उनके बदलने की कोई गुंजाईश नहीं होती है. इसलिए यह स्वाभाविक ही है कि वह कानून बदलने की कोशिश करे और बुर्जुआ विधानों के स्थान पर सर्वहारा विधानों को लागू करने का प्रयत्न करे. यही वजह थी कि अंग्रेज मजदूरों को सुधारों की योजना तैयार करने की प्रेरणा मिली जिसे पीपुल्स चार्टर में प्रस्तुत किया गया था. वह एक विशुद्ध राजनीतिक दस्तावेज़ था जिसका उद्देश्य अन्य बातों के अलावा, हाउस ऑफ़ कामन्स का जनवादी पुनर्गठन था. चार्टिस्ट आन्दोलन बुर्जुआ वर्ग के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के विरोध की सघन अभिव्यक्ति थी. ट्रेड यूनियनों और हड़तालों में व्यक्तिगत मजदूर या मजदूरों का समूह व्यक्तिगत बुर्जुआ के खिलाफ संघर्ष छेड़ देता था जिससे इसका स्थानीय और एकाकी रूप जाहिर होता था. यदि कभी-कभी यह संघर्ष व्यापक रूप धारण कर लेता था तो इसकी शायद ही कभी यह वजह होती थी कि मजदूर खुद सचेतन रूप से ऐसा चाहते थे. जहाँ तक आन्दोलन के सुविचारित विस्तार का प्रश्न है, यह चार्टिस्ट आन्दोलन की देन है. क्योंकि चार्टिस्ट आन्दोलन में सारा मेहनतकश वर्ग बुर्जुआ के खिलाफ हो गया था. उसका पहला हमला बुर्जुआ की राजनीतिक सत्ता पर हुआ और उसने इस सत्ता को सुरक्षा प्रदान करने वाली कानूनी दीवारों में दरार पैदा करने की कोशिश की.” (एंगेल्स, द कन्डीशन ऑफ़ द वर्किंग क्लास इन इंग्लैंड पृ. 227-28)

सन 1838 में हाउस ऑफ़ कामन्स के छह सदस्यों और लन्दन वर्किन्गमेंस एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के लन्दन में हुए अधिवेशन में पीपुल्स चार्ट का प्रारूप तैयार किया था. इनकी मुख्य मांगे थीं :
(१) इक्कीस वर्ष से अधिक आयु के पुरषों के लिए सार्विक मताधिकार,
(२) सालाना संसद,
(३) संसद सदस्यों के लिए संपत्ति की अहर्ता का खात्मा,
(४) गुप्त मतदान से चुनाव,
(५)अधिक न्यायोजित प्रतिनिधित्व के लिए समान निर्वाचक मंडल,
(६) सदस्यों को पारिश्रमिक.

एंटी-प्रूधों में मार्क्स उस प्रक्रिया का विवरण देते हैं जिसके अर्न्तगत मेहनतकश लोग धीरे-धीरे अपने हित के लिए एक वर्ग में संगठित हो जाते हैं और जिसके अर्न्तगत मेहनतकश वर्ग चेतना का विकास करता है. उन्हीं के शब्दों में;

“पूंजीवाद युग के प्रारंभ में आबादी का बड़ा हिस्सा आर्थिक कारणों से उज़रती मजदूरों में तब्दील हो गया. पूंजी की सत्ता ने उन स्थितियों को पैदा किया जिन्होनें मेहनतकशों को समग्र रूप में प्रभावित किया जिससे उनके हित समान हो गए. इस प्रकार एक वर्ग के रूप में वे पहले ही समेकित हो चुके थे जो पूंजीपतियों के खिलाफ खडा था हालाँकि एक अलग वर्ग के रूप में अपनी हैसियत की पहचान उन्हें नहीं हो पाई थी. संघर्ष के दौरान ही मेहनतकशों का समूह समेकित होता है ताकि वह अपने आप को एक सुस्पष्ट वर्ग के रूप में पहचान सके. जिन हितों की रक्षा के लिए वे संघर्ष करते हैं वे उनके वर्ग हित बन जाते हैं लेकिन एक वर्ग का दूसरे वर्ग के खिलाफ संघर्ष, राजनीतिक संघर्ष ही होता है.” (मार्क्स, द पावर्टी ऑफ फिलासफी, पृ. 136)

उन्नीसवीं शताब्दी के प्रथम चतुथार्श में सर्वहारा ने एक वर्ग, समाज के एक सुस्पष्ट हिस्से, उत्पादन प्रक्रिया में एक विशिष्ट भूमिका निबाहने वाले लोगों के समूह के रूप में निश्चित शक्ल अख्तियार की. इस समय सर्वहारा वैज्ञानिक पड़ताल की विषयवस्तु  बन जाता है. इसका अस्तित्व इतना सुस्पष्ट बन जाता है कि बुर्जुआ राजनीतिक अर्थशास्त्र का मुख्य कार्यभार उन नियमों की व्याख्या करना है जिनके अर्न्तगत पूंजीवादी व्यवस्था में समाज के तीन वर्गों – भूस्वामी कुलीन वर्ग, बुर्जुआ वर्ग और मजदूर वर्ग के बीच मालों का वितरण होता है. तो भी एक विशिष्ट वर्ग जिनके अपने विशिष्ट वर्ग हित हों, अपने विशिष्ट कार्यभार हों, संक्षेप में स्वयं के महत्त्व के अनुरूप पृथक वर्ग की चेतना से लैस होने में मेहनतकश लोगों को बहुत साल लगे.

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One thought on “चार्टिस्ट आन्दोलन – मेहनतकश वर्ग का राजनीतिक संगठन

    परमजीत बाली said:
    June 20, 2009 at 9:31 AM

    बढिया पोस्ट लिखी है।

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