मैन्युफैक्चर और बड़े पैमाने के उत्पादन (मशीनोफैक्चर) की कालावधियों में श्रम विभाजन

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17. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव

की व्याख्यात्मक टिप्पणियां

दस्तकार किसी वस्तु के एक के बाद एक दूसरे हिस्से को बनाते जाते हैं जो अंत में विक्रय के लिए तैयार माल बन जाता है. शिल्प संघ के विकास की उच्चतम अवस्था में भी उत्पादन के क्षेत्र में उपविभाजन की संख्या बहुत कम थी. लेकिन विनिर्माण की शुरुआत के साथ, श्रम का विशुद्ध यांत्रिक विभाजन हुआ जिसके अर्न्तगत माल तैयार करने की उत्पादन प्रक्रिया में मजदूर काम के एक छोटे हिस्से को पूरा करता है. तो भी इस अवधि में भी उद्योग की कुछ शाखाओं में उत्पादन की विस्तृत प्रक्रियाओं में श्रम विभाजन हुआ और दूसरी शाखाएँ बची रह गयी. इसके अलावा विनिर्माण के अर्न्तगत मजदूर अपने हाथ से सारा उत्पादन करता था जो उसकी दक्षता और योग्यता पर निर्भर करता था.
“दस्तकारी और मैन्युफैक्चर में मजदूर औजारों का इस्तेमाल करता है, कारखाना में मजदूर मशीन की सेवा करता है. पहली स्थिति में मजदूर श्रम के साधनों के संचालन पर नियंत्रण रखता है तो दूसरी स्थिति में मजदूर की गतिविधियाँ मशीन के अधीन होती हैं. विनिर्माण में मजदूर सक्रीय तंत्र का एक हिस्सा होते हैं. कारखानों में मजदूरों से स्वतन्त्र एक जड़ तंत्र होता है और मजदूर इसमें जीवित उपांगो की तरह शरीक होते हैं. अंतहीन चाकरी और कठिन परिश्रम की नीरस नित्य-क्रिया, जिसमें एक ही यांत्रिक प्रक्रिया को लगातार दुहराना पड़ता है, सिसिफस की यंत्रणा के समान होता है अर्थात चट्टान जैसा कड़ी मेहनत का बोझ थके हुए कर्मी पर गिरता रहता है. मशीनों पर काम करने से स्नायुतंत्र पर अवसादक असर पड़ता है. इसी के साथ यह मांसपेशियों की विविध गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न कर देता है और स्वतन्त्र शारीरिक और बौधिक गतिविधियों को रोक देता है. यहाँ तक की काम के बोझ को हल्का कर देना यंत्रणा का साधन बन जाता है क्योंकि मशीन मजदूर को काम से मुक्त नहीं करती है बल्कि काम में उसकी दिलचस्पी को ख़त्म कर देती है. ” (मार्क्स, कैपिटल, खंड 1, पृ. 451) मशीन पर काम करने वाले मज़दूर की तुलना सिसिफस से करने वाला उद्धरण मार्क्स ने एंगेल्स की पुस्तक द कन्डीशन ऑफ द वर्किंग क्लास इन इंग्लैंड, 1845, पृ. 217, से और एंगेल्स ने जेम्स फिलिप के, एम.डी. की पुस्तक मैनचेस्टर के वस्त्र उत्पादन में नियोजित मज़दूर वर्ग की नैतिक एवं भौतिक जीवन स्थितियां से लिया है. (रिजवे, लन्दन 1832, पृ.8)
मशीन से उत्पादन करने के लिए यह आवश्यक होता है कि कच्चे माल, अर्द्ध-निर्मित सामान और औजारों की आपूर्ति में वृद्धि हो और इससे उद्योग की ज़्यादा शाखाएँ खोलने के लिए प्रेरणा मिलती है. उत्पादन प्रणाली की असंख्य नयी किस्मों और उप-किस्मों द्वारा इस कच्ची सामग्री और अर्द्ध-निर्मित सामान को तैयार किया जाता है जिससे ‘ट्रेडों’ की संख्या में भारी वृद्धि हो जाती है. जर्मन आंकडों के अनुसार 1882 में ट्रेडों और पेशों की संख्या 6000 आंकी गयी थी. 1895 में यह संख्या लगभग 10,000 हो गयी थी.
इस प्रकार पूंजीवाद के अर्न्तगत बड़े पैमाने के उत्पादन ने न केवल स्थायी विशेषता वाले पुराने श्रम विभाजन को समाप्त कर दिया बल्कि विशिष्ट प्रक्रियाओं की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि कर दी. इससे विशेष काम करने वाले मज़दूर की स्थिति पहले से ज़्यादा खराब हो जाती है यदि इस बात को ध्यान में रखा जाये कि यह घटनाओं में निहित संकटों पर पूर्णतया आश्रित होता है जिससे उसके भौतिक जीवन के आधार की सुरक्षा और दृढ़ता जोखिम में पड़ जाती है.

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