मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-2. हेक्स्टहाउज़ेन, मॉरेर और मॉर्गन

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2. हेक्स्टहाउज़ेन, मॉरेर और मॉर्गन

कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र के बाद के संस्करणों में एंगेल्स (1820 -1895) ने “समस्त मानव-समाज के इतिहास” वाक्यांश के बाद निम्न टिपण्णी जोड़ दी थी : ‘अर्थात समस्त लिपिबद्ध इतिहास” 1847 में समाज का आदिम इतिहास अर्थात लिखित इतिहास से पहले का सामाजिक संगठन बिलकुल अज्ञात था.उसके बाद हेक्स्टहाउज़ेन ने रूस में भूमि के सामुदायिक स्वामित्व का पता लगाया,  मॉरेन ने सिद्ध किया कि यही सामुदायिक स्वामित्व समस्त ट्यूटन नस्लों के इतिहास का सामाजिक आधार था और धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता गया कि भारत से लेकर आयरलैंड तक समाज का आदि रूप ग्राम समुदाय था जिसमें भूमि का स्वामित्व समुदाय के पास होता था. गोत्र के असली स्वरूप और कबीले के साथ उसके सम्बन्ध की मॉर्गेन की महत्ती खोज द्वारा विस्तार से इस आदिम कम्युनिस्ट समाज का आन्तरिक संगठन. अपने ठेठ रूप में, अनावृत हुआ. इस आदिम समाज के विघटन के साथ समाज का अलग-अलग वर्गों में विभाजन आरंभ हुआ तो कालांतर में विरोधी वर्ग बन गए.”

ऑगस्ट फ़ान हेक्स्टहाउज़ेन (1792-1866) प्रशिया के एक सामंत थे. 1843 में निकोलस प्रथम के अनुरोध पर भूमि कानूनों, कृषि की समस्याओं और किसानों के जीवन के बारे में पड़ताल करने और रिपोर्ट देने के लिए वह रूस गये. (रूसी ग्रामीण जीवन का अध्ययन) नाम की रचना में उनके श्रम का परिणाम संग्रहित है. जिसका पहला खंड 1847 में, और तीसरा खंड 1852 में, कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र के प्रकाशन के लगभग पॉँच वर्ष बाद प्रकाशित हुआ. तीसरा खंड मुख्यतया रूसी कृषि पंचायती संस्थाओं के बारे में है. रूस में यात्रा के दौरान हेक्स्टहाउज़ेन के साथ अलेक्सांद्र हर्ज़न थे जिनकी क्रांतिकारी राजनितिक रचनाओं ने बाद में उन्हें इतनी प्रसिद्धि दी. अपने मित्र से प्रभावित होने के कारण हेक्स्टहाउज़ेन ने रूसी कृषि पंचायती संस्थाओं के महत्त्व पर बल दिया जिन्हें वह सर्वहारा विकास की अवधि से गुज़रने की “महामारी’ से रूस को बचाने का एक साधन मानते थे.

जार्ज लुडविग फान मॉरेर (1790-1872) महान जर्मन इतिहासकार, कानूनविद, राजनेता और जर्मनी की प्राचीन संस्थाओं पर कई रचनाओं के लेखक थे. कई खंडो वाली इन रचनाओं का प्रकाशन अठारह सौ पचास और साठ के दशक में हुआ था और इनमें जर्मनी की ग्रामीण और नगरीय पंचायती संस्थाओं पर सर्वांगीण  रूप से विचार किया था. पुराने दृष्टिकोण के खिलाफ (जिसके अवशेष कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र में भी पाए जाते हैं) मॉरेर ने सिद्ध किया कि मध्ययुग के आरंभ में नगर क्षेत्रों का विकास मध्ययुगीन दास-प्रथा से उदभूत न होकर स्वतन्त्र ग्रामीण समुदाय (मध्युगीन मार्क) से हुआ था.

अमेरिकावासी लुईस हेनरी मॉर्गन (1818-1881) (Ancient Society Or Researches in the Lines of Human Progress from Savagery through Barbarism to Civilization By Lewis H. Morgan, LL. D) नृवंशविज्ञानी  और आदिम सामाजिक संगठनों के अध्येता थे. वह इराक्यू इंडियनों के बीच रहे, उन्हीं के जैसा जीवन जिया था और उनके आचरण तथा रीती-रिवाज का अध्ययन किया. उनका मत था कि एतिहासिक विकास में बुनियादी महत्त्व के कारक तकनीक के क्षेत्र में खोजों, आविष्कारों, जीवन की भौतिक परिस्थितियों के विकास में निहित हैं. मानव परिवार के विकास, विशेषतया सगोत्रता एवं विवाह सम्बन्धी रीती-रिवाज़ सम्बंधित  उनके विचारों की ओर एंगेल्स आकृष्ट हुए और 1884 में पहली बार प्रकाशित अपनी पुस्तक परिवार, निजी संपत्ति और राज्य की उत्पत्ति (The Origin of the Family, Private Property and the State) में इनका विवेचन किया. इस पुस्तक में एंगेल्स ने इतिहास के आरंभ से समाज के विकास की दिशा का पता लगाने और वर्ग समाज में इसके क्रमिक परिवर्तन को समझाने की कोशिश की है.

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