उजाले के दरीचे-‘विहान’ संगीत मण्डली के गीत

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क्या जुल्मतों के दौर में भी गीत गाए जायेंगे?
http://sites.google.com/site/bigulfebruary2009/Home/ujaalekedariche.mp3?attredirects=0
हाँ, जुल्मतों के दौर के ही गीत गाए जायेंगे!
‘विहान’ आपके बीच आया है
एक अँधेरे समय में,
अँधेरे के बारे में सच्चाईयां बयान करते गीतों को लेकर |
और उजाले की उम्मीदों के गीतों को लेकर |
ज़िन्दगी की तकलीफों और जद्दोजहद के गीतों को लेकर
और साथ ही सपनों और भविष्य का संगीत लेकर |
हमारे गीत आज की जिंदगी के अँधेरे में
उजाले के दरीचे बन सके,
इसी उम्मीद के साथ, इन्हें लेकर हम आपके बीच आये हैं |
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One thought on “उजाले के दरीचे-‘विहान’ संगीत मण्डली के गीत

    मार्क्‍सवादी said:
    March 8, 2009 at 7:41 PM

    प्रिय साथी,

    आप लोग बेहद शानदार काम कर रहे हैं। आपके ब्‍लॉग को देखने के बाद मैं एक दो सुझाव देना चाहता हूं। उम्‍मीद है आप इन पर ग़ौर करेंगे।
    1. सर्वहारा संगीत-कला आदि पर कुछ नियमित और श्रृंखलाबद्ध तरीके से लिखेंगे तो बेहतर रहेगा।

    2. आप संघ और उसके अलग-अलग संगठनों के कारनामों, उनके काले इतिहास और जनता में उनके द्वारा प्रचारित तर्कों के संबंध में एक श्रृंखला शुरू कीजिए, आर्थिक मंदी बढ़ने के साथ उनकी हरकतें और झूठा प्रचार भी बढ़ेगा, ऐसे में लोगों तक उनकी असलियत पहुंचाना जरूरी है।

    ये मेरे विनम्र सुझाव हैं, अपेक्षा है कि आप इन्‍हें अन्‍यथा नहीं लेंगे।

    मार्क्‍सवादी

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