समाजवाद की हार को अंश में न देखकर समग्रता में देखना सीखाता है हमें द्वंदात्मक भौतिकवाद

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सर्वहारा की उन्नत इकाइओं को

विरोधों की एकता की अवधारणा

को आत्मसात करना होगा

समाजवाद के प्रथम चरण के संसार भर में असफल हो जाने के वाद ( समाजवाद अपने प्रथम चरण में अपने अगले उच्च्तर पड़ाव साम्यवाद में प्रवेश करने में असफल रहा है और ज्यादातर कम्यूनिस्ट पार्टियों के चरित्र का बोलेश्विक तत्व या तो हार मान चुका है या फिर पूर्णतया अपने उल्ट में प्रवर्तित हो चुका है !) सर्वहारा के सच्चे सैनिक निट्ठले बैठे हों, ऐसी स्थिति की कल्पना मात्र द्वंदात्मक भौतिकवाद से मुँह फेर लेना होगा और जैसा कि एंगेलज़ ने कहा है कि सब से गंभीर चिंतन इतिहास के उस दौर में होता है जब समाज ठहराव या निराशा और  हार के बोध से वावस्ता  हो !

जहाँ तक एक कम्यूनिस्ट की व्यक्तिगत जिंदगी और उसकी राजनीतिक प्रतिबद्धता का संबंध है तो दोनों के बीच में सामन्जस्य बिठाना तो दूर की बात, अगर कहें कि एक कम्यूनिस्ट का व्यक्तिगत जीवन अपने वर्ग सर्वहारा के जीवन से किसी भी तरह अलग प्रकार का है तो उस कम्यूनिस्ट या उसकी कम्यूनिस्ट पार्टी को देर सवेर इसकी कीमत चुकानी होगी और इससे भी बढ़कर कीमत चुकाता है वह वर्ग जिसकी राजनीति करने का दम कम्यूनिस्ट भरते हैं ! अन्य बहुत से वस्तुगत कारणों को अगर दरकिनार भी कर दिया तो सर्वहारा का 20वीं सदी के उत्तरार्ध में बुर्जुया वर्ग के हाथों हार जाने में कम्युनिस्टों के व्यक्तिगत जीवन के अंतर्विरोध क़ी भी अहम भूमिका रही है!

लेकिन उपर लिख्त तरीके से विश्लेषण हमें स्थिति के सरलीकरण क़ी ओर और पूरी स्थिति को ही अध्यात्मिक विचारवाद क़ी गर्त में ले जा कर डूबा देने क़ी ओर होगा ! द्वंदात्मक भौतिकवाद सिखाता है कि वर्गीय समाज मे सर्वहारा के सता पर काबिज हो जाने के वाद भी वर्ग संघर्ष जारी रहता है ! इतना ही नहीं शुद्ध से शुद्ध कम्यूनिस्ट पार्टी के अंदर सर्वहारा और बुर्जुया तत्वों के टकराव को सिरे से नकार देना उस कम्यूनिस्ट पार्टी के अस्तितव व इस टकराव से पैदा हुई गति को ही नकारना होगा ! इससे भी बढ़कर वर्गीय समाज में किसी राजनीतिक संगठन में विरोधी तत्वों से रहित होना इस बात कि अध्यात्मक स्वीकृति होगी कि समाजवाद की उच्च्तर मंजिल में भी किसी कम्यूनिस्ट या अन्य राजनीतिक संगठन की सार्थकता बनी रहेगी ! इन अंतरविरोधो को सिरे से नकार देना मार्क्सवाद को एक जीवंत और सतत विकासमान विज्ञान न समझकर महज एक नया कठमुल्लावाद बना देना होगा !……….जारी.

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