हमारे बारे में

विपर्यय और पूंजीवाद पुनरूथान के वर्तमान अंधकारमय दौर में पूरी दुनिया की बुर्जुआ मिडीया और बुर्जुआ राजनीतिक साहित्य ने समाजवाद के बारे में तरह-तरह के कुत्सा प्रचार करके विगत सर्वहारा क्रांतियों की तमाम विस्मयकारी उपलब्धियों को झूठ के अम्बार तले ढँक दिया है. आज की युवा पीढी सर्वहारा क्रांति के विज्ञान और विगत सर्वहारा क्रांतियों की वास्तविकताओं से सर्वथा अपरिचित है. उसे यह बताने की जरूरत है कि मार्क्सवाद के सिद्धांत क्या कहते हैं और इन सिद्धांतों  को अमल में लाते हुए बीसवीं शताब्दी की सर्वहारा क्रांतियों ने क्या उपलब्धियां हासिल की. उन्हें यह बताना होगा कि सर्वहारा क्रांतियों के प्रथम संस्करणों की पराजय कोई अप्रत्याशित बात नहीं थी और फ़िर उनके नए संस्करणों का सृज़न और विश्व  पूंजीवाद की पराजय भी अवश्यम्भावी है. उन्हें यह बताना होगा कि विगत क्रांतियों ने पराजय के बावजूद पूंजीवादी पुनर्स्थापना को रोकने का उपाय भी बताया है और इस सन्दर्भ में चीन की

सर्वहारा सांस्कृतिक क्रांति की शिक्षायों का युगांतरकारी

महत्व है. आज के सर्वहारा  वर्ग की नई पीढी को इतिहास की इन्हीं शिक्षाओं से परिचित  कराने के कार्यभार को हम

नए सर्वहारा पुनर्जागरण

का नाम देते हैं. लेकिन इक्कीसवीं सदी की सर्वहारा क्रांतियाँ हू-ब-हू बीसवीं सदी की सर्वहारा क्रांतियों के नक्शे कदम पर चलेंगी, ऐसा ज़रूरी नहीं है. ये अपनी महान पूर्वज क्रांतियों से ज़रूरी बुनियादी शिक्षाएं लेंगी और फ़िर इस विरासत के साथ, वर्तमान परिस्थितियों का अध्ययन करके, पूँजी की सत्ता को निर्णायक शिकस्त देने की रणनीति एवं आम रणकौशल विकसित करेंगी. यह प्रक्रिया गहन सामाजिक प्रयोग, उनके सैद्धांतिक समाहार, गंभीर शोध-अध्ययन, वाद-विवाद, विचार-विमर्श और फ़िर नई सर्वहारा क्रांतियों की प्रकृति, स्वरूप एवं रास्ते से सर्वहारा वर्ग और क्रांतिकारी जनसमुदाय को परिचित कराने की प्रक्रिया होगी. इन्हीं कार्यभारों को हम

नए सर्वहारा प्रबोधन

के कार्यभार के रूप में प्रस्तुत करते हैं. मार्क्सवादी दर्शन को सर्वोतोमुखी नई समृद्धि तो भावी नई समाजवादी क्रांतियाँ ही प्रदान करेंगी, लेकिन यह प्रक्रिया नए सर्वहारा प्रबोधन के कार्यभारों को अंजाम देने के साथ ही शुरू हो जायेगी. नए सर्वहारा प्रबोधन के कार्यभार विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय के वर्तमान दौर में, तथा विश्व पूंजीवाद की प्रकृति एवं कार्यप्रणाली का अध्ययन करके श्रम और पूँजी के बीच के विश्व-ऐतिहासिक महासमर के अगले चक्र में पूँजी की शक्तियों की अन्तिम पराजय को सुनिश्चित बनाने की सर्वोतोमुखी तैयारियों के कठिन चुनौतीपूर्ण दौर में, सर्वहारा वर्ग के अनिवार्य कार्यभार हैं जिन्हें सर्वहारा वर्ग का हिरावल  दस्ता अपनी सचेतन कार्रवाईओं के द्वारा नेतृत्व प्रदान करेगा. ये कार्यभार पार्टी-निर्माण के कार्यभारों के साथ अविभाज्यत: जुड़े हुए हैं और पार्टी-निर्माण के प्रारम्भिक चरण से ही इन्हें हाथ में लेना ही होगा, चाहे हमारे ऊपर अन्य आवश्यक राजनीतिक-सांगठनिक कामों का बोझ कितना भी अधिक क्यों न हो! इन कार्यभारों  को पूरा करने वाला नेतृत्व ही नई समाजवादी क्रांति की लाइन को आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक अध्ययन और ठोस सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परस्थितियों के अध्ययन के काम को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा पायेगा.

नई समाजवादी क्रांति के

नए सर्वहारा पुनर्जागरण और नए सर्वहारा प्रबोधन

के इन बुनियादी कार्यभारों को अंजाम देने के लिए

अनेकों कृतसंकल्प संगठनों के कार्यकर्त्ता जी-जान से जुटे हुए हैं।

शहीद भगत सिंह विचार मंच

भी इन साथियों का उनके इस अभियान के समर्थक के रूप में

यथासंभव सहयोग कर रहा है।

यह ब्लॉग शहीद भगत सिंह विचार मंच

की एक छोटी सी कोशिश है।

इस ब्लॉग पर हम

नए सर्वहारा पुनर्जागरण और नए सर्वहारा प्रबोधन

से जुड़े अन्य साथियों द्वारा प्रकाशित

पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं, पर्चों आदि से सामग्री देते रहेंगे।

हम देश-विदेश में प्रकाशित

हमारे लक्ष्य से सम्बंधित अन्य साहित्य से भी

ज़रूरी सामग्री देते रहेंगे।

ब्लॉग पर बिना स्रोत के प्रकाशित  लेखों, टिप्पणियों आदि

की पूरी जिम्मेंदारी शहीद  भगत सिंह विचार मंच की होगी।

ब्लॉग और ब्लॉग पर दी जाने वाली सामग्री के बारे में

सुझावों, विचार-विमर्श और बहस-वादविवाद

हमें खुलेदिल से इंतजार रहेगा।

अपने सुझाव भेजें : drhundal@yahoo.co.in


10 thoughts on “हमारे बारे में

    loksangharsha said:
    November 16, 2009 at 8:21 PM

    nice

    mukesh said:
    November 29, 2009 at 11:18 PM

    very hard laguage

    नारदमुनि said:
    June 5, 2010 at 7:36 PM

    “हम देश-विदेश में प्रकाशित हमारे लक्ष्य से सम्बंधित अन्य साहित्य से भी ज़रूरी सामग्री देते रहेंगे।” Good
    क्या, सोशलिस्ट यूनिटी सेंन्टर आॅफ इंछिया के संस्थापक कामरेड शिवदास घोष के आलेख भी इस पर उपलब्ध कराए जाएंगे, या आपने कभी उनका नाम सुना ही नहीं।

    नारदमुनि

    prahlad rai vyas said:
    October 26, 2011 at 5:34 PM

    sarvhara hit me sanskritik jagaran ka aap ko abhiyan safal hoga.chhatro ko rajniti kyo jarna hai.inglab ho.

    prahlad rai vyas said:
    November 3, 2011 at 5:26 PM

    kranti chikanaee nahi pathar ki kharoch mangati hai.suvidha bhogi vyaki kranti ke agava nhi hote.

    prahlad rai vyas advocate said:
    November 5, 2011 at 8:08 PM

    munafavadi bazaru soch chintan dhrastikon ne aadami ko janava bana diya hai.

    prahlad rai vyas advocate said:
    November 13, 2011 at 12:39 PM

    sarvhara drastikon jab tak nhi banega tab tak n kranti ki party v sanskriti nahi banegi.neta neetiya v neeyat theek ho.

    advocate prahlad rai vyas said:
    January 16, 2012 at 7:54 AM

    bhrastachar kalabazari zamakhori milavat achuk munafa punjee ka kendriya karan sarvhara ka nirmam shoshan ghor garibi ?

    advocate prahlad rai vyas said:
    February 3, 2012 at 7:03 PM

    khadya surksha aaj ki aham aavshykta hai.shiksha ka neeji karan vyavsayi karan khatarnak hai.punjeevadi chintan badale.

    prahlad rai vyas advocate said:
    April 15, 2012 at 5:56 PM

    bhrastachar ka karan punjeevad ki zarurat ka parinam hai.lobh lalach se hi naitik patan ho raha hai.samajvadi rassiya ?

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